

अंबाला में निर्माणाधीन रिंग रोड को लेकर किसानों और पुलिस के बीच गुरुवार को तीखा टकराव देखने को मिला। खेतों तक वैकल्पिक मार्ग देने की मांग को लेकर पिछले 10 दिनों से धरने पर बैठे किसानों को पुलिस ने मौके से हटाया और धरनास्थल खाली करवा दिया। इस दौरान कई किसानों को हिरासत में लिया गया।
पुलिस कार्रवाई से नाराज किसान अंबाला-जगाधरी नेशनल हाईवे की ओर बढ़ने लगे। हालात को देखते हुए हाईवे और रिंग रोड क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। प्रशासन ने धरनास्थल से तंबू और चारपाइयां हटवाकर निर्माण कार्य दोबारा शुरू करवा दिया।


क्या है पूरा मामला?
अंबाला में पांच राष्ट्रीय राजमार्गों को आपस में जोड़ने के लिए रिंग रोड का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत:
- National Highways Authority of India (एनएचएआई) की देखरेख में कार्य जारी है।
- रिंग रोड बनने के बाद NH-152, NH-344, NH-444A, NH-44 और NH-65 आपस में जुड़ जाएंगे।
- परियोजना का आधे से अधिक कार्य पूरा हो चुका है।
गांव सपेड़ा और आसपास के पांच गांवों के किसानों का कहना है कि रिंग रोड बनने से उनके खेतों तक जाने का रास्ता प्रभावित होगा। साथ ही बरसाती पानी की निकासी में भी बाधा आने की आशंका है।

10 दिन से जारी था धरना
किसान पिछले 10 दिनों से वैकल्पिक रास्ते की मांग को लेकर धरने पर बैठे थे। इस दौरान एनएचएआई अधिकारियों से बातचीत भी हुई, लेकिन कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला।
गुरुवार दोपहर जब किसानों को समाधान की उम्मीद नहीं दिखी तो उन्होंने निर्माण में लगी मशीनों की घेराबंदी शुरू कर दी। स्थिति तनावपूर्ण होते ही प्रशासन ने अंबाला, महेशनगर और साहा थाना क्षेत्र से पुलिस बल बुला लिया। इसके बाद पुलिस ने धरनास्थल खाली कराते हुए किसानों को हटाया और कुछ को बसों में बैठाकर हिरासत में लिया।

हाईवे की ओर कूच, नारेबाजी
कार्रवाई से नाराज किसान रिंग रोड के समीप ही बैठकर विरोध जताने लगे। बाद में वे अंबाला-जगाधरी हाईवे की ओर बढ़े। मौके पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए।
शाम करीब पांच बजे भारतीय किसान यूनियन के नेता Gurnam Singh Chaduni भी घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। इससे पहले वे महापंचायत की घोषणा भी कर चुके हैं और सोशल मीडिया के जरिए अधिक से अधिक लोगों से शामिल होने की अपील की थी।
निर्माण कार्य दोबारा शुरू
धरनास्थल खाली कराए जाने के बाद एनएचएआई ने रिंग रोड का काम दोबारा तेज कर दिया। जनवरी माह में भी किसानों द्वारा कार्य रुकवाया गया था। प्रशासन पर परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का दबाव बताया जा रहा है।
फिलहाल क्षेत्र में स्थिति संवेदनशील बनी हुई है और पुलिस बल तैनात है। प्रशासन और किसानों के बीच आगे की बातचीत पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
