
पार्षदों के मुद्दों को एजेंडा में शामिल ना करना अधिनियम व संविधान की अवहेलना-: टीम चित्रा पार्षद
अंबाला छावनी:- नगर परिषद अंबाला छावनी की बैठक में टीम चित्रा के पार्षद राहुल सोनकर (वीरू),संदीप शर्मा (दिप्पी पंडित),नीलम कश्यप एवं रणजीत कुमार(सोनू गुज्जर) ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली, बैठक पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्षदों ने स्पष्ट किया कि यह मात्र राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि नगर परिषद के अधिकारियों और सत्ताधारियों द्वारा संविधान की अनुपालना ना किए जाने पर सवाल है।
पार्षद नीलम कश्यप ने एजेंडा निर्माण की प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि सभी पार्षदों से उनके-अपने वार्डों के विकास संबंधी प्रस्ताव लिखित रूप में लिए गए थे, किंतु एजेंडा सूची में उनके किसी भी प्रस्तावों को सम्मिलित नहीं किया गया। उन्होंने प्रश्न उठाया कि क्या एजेंडा तय करने की कोई निर्धारित समय सीमा थी, क्या प्रस्ताव निर्धारित प्रारूप में जमा किए गए थे और यदि हां, तो उन्हें एजेंडा में शामिल न करने का कारण क्या है। उनका कहना है कि टीम चित्रा के चयनित पार्षदों के प्रस्तावों की अनदेखी प्रशासनिक पक्षपात को दर्शाती है और यह स्थानीय स्वशासन की मूल भावना के विपरीत है।
पार्षद रणजीत कुमार (सोनू गुज्जर) ने एजेंडा से मुद्दों को बाहर रखने तथा अधिकारियों पर कथित दबाव को लेकर गंभीर शंका व्यक्त करते हुए कहा कि यदि आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले पार्षदों के मुद्दे एजेंडा में स्थान नहीं पाते, तो ऐसी बैठक की वैधता और औचित्य पर स्वतः प्रश्नचिह्न लग जाता है। उन्होंने कहा कि किसी भी बैठक को वैध तभी माना जा सकता है जब विधिवत नोटिस जारी किया गया हो, कोरम पूरा हो, कार्यवाही सही ढंग से दर्ज की जाए और उसे विधिवत अनुमोदित किया जाए, अन्यथा ऐसी बैठक को विधिक रूप से चुनौती दी जा सकती है।पार्षदों ने यह भी कहा कि जब संसद और विधानसभा में कार्यवाही अधिकृत रूप से दर्ज होती है और किसी कथन को हटाने की स्थिति में उसका स्पष्ट उल्लेख किया जाता है, तो क्या नगर परिषद में भी वही सिद्धांत लागू किए जा रहे हैं। क्या बैठक के पश्चात निर्धारित समय के भीतर कार्यवाही की प्रमाणित प्रति तैयार कर सदस्यों को वितरित की गई, क्या उसकी प्रति मीडिया को उपलब्ध कराई गई, और यदि किसी कथन को कार्यवाही से हटाया गया तो उसका विधिवत उल्लेख किया गया या नहीं — इन सभी प्रश्नों को आगामी बैठक में विधिक आधार के साथ उठाया जाएगा।
पार्षद राहुल सोनकर (वीरू) का कहना है कि नगर परिषद की प्रत्येक बैठक की कार्यवाही लिखने के लिए अधिकृत अधिकारी/कर्मचारी का नाम हाउस के समक्ष घोषित किया जाना अनिवार्य है, क्योंकि कार्यवाही रजिस्टर एक सार्वजनिक दस्तावेज होता है और उसी की पारदर्शिता पर पूरी बैठक की वैधता निर्भर करती है। उन्होंने यह मांग भी रखी कि जुलाई 2025 में आयोजित पहली बैठक की कार्यवाही किस अधिकारी या कर्मचारी द्वारा लिखी गई थी, उसका नाम सार्वजनिक रूप से बताया जाए तथा उसकी प्रमाणित प्रति सभी सदस्यों को उपलब्ध कराई जाए,ताकि विधिसम्मत पुष्टि की जा सके।
पार्षद संदीप शर्मा (दिप्पी पंडित)ने विशेष रूप से यह प्रश्न उठाया कि जुलाई के बाद लंबे समय तक बैठक न बुलाना क्या हरियाणा नगरपालिका अधिनियम प्रावधान का उल्लंघन है, जिसमें नियमित अंतराल पर बैठक आयोजित करना अनिवार्य किया गया है। नगर परिषद कि बैठक लम्बे अंतराल लगभग आठ महीने बाद बुलाई गई हैं। जबकि एक महीने में एक बैठक होना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि यदि अध्यक्ष अथवा प्रधान समय पर बैठक नहीं बुलाते, तो सदस्यों को विशेष बैठक बुलाने का अधिकार प्राप्त है। ऐसे में यह स्पष्ट किया जाए कि निर्धारित अवधि में बैठक क्यों नहीं बुलाई गई तथा क्या इस संबंध में सक्षम प्राधिकारी को कोई सूचना दी गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि बैठक में उनके द्वारा व्यक्त किए गए विचारों और आपत्तियों को शाब्दिक रूप से मिनट्स में दर्ज किया जाना चाहिए, क्योंकि असहमति दर्ज करना प्रत्येक निर्वाचित सदस्य का विधिक अधिकार है।
पार्षदों ने स्पष्ट किया कि यदि मिनट्स की प्रमाणित प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई, एजेंडा पारदर्शी प्रक्रिया से तय नहीं हुआ, नियमित बैठक की बाध्यता का पालन नहीं किया गया अथवा सदस्यों की असहमति दर्ज नहीं की गई, तो यह अधिनियम और लोकतांत्रिक मूल्यों की अवहेलना होगी, जिसके विरुद्ध सक्षम प्राधिकारी से लेकर न्यायालय तक जाने का अधिकार वे सुरक्षित रखते हैं।
अंत में सभी पार्षदों ने कहा कि नगर परिषद की ऐसी बैठक का कोई फायदा नहीं जो जनता के सामने पूरी पारदर्शिता के साथ ना आ सके। इसलिए हम सभी पार्षदगण इस बैठक का विरोध करते हुए बहिष्कार करते हैं और आज हम टीम चित्रा के सभी पार्षद इस बैठक से वाकआउट करते हैं।
