
पीपीपी की गलत डेटा एंट्री ने हजारों बुज़ुर्गों को काग़ज़ों में अमीर और ज़मीनी हकीकत में लाचार बना दिया
अंबाला | विशेष संवाददाता
हरियाणा में सामाजिक सुरक्षा पेंशन अब बुज़ुर्गों का अधिकार न रहकर सरकारी पोर्टलों की दया पर निर्भर हो गई है। अंबाला जिले में परिवार पहचान पत्र (PPP) में की गई कथित “डेटा अपडेटिंग” के चलते हजारों बुज़ुर्गों, विधवाओं और गरीब परिवारों की पेंशन महीनों से बंद पड़ी है।
हरियाणा कांग्रेस विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री चौधरी निर्मल सिंह ने इसे प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि गरीबों के खिलाफ़ सुनियोजित डिजिटल हिंसा करार दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय जिस बुढ़ापा पेंशन को “मानदेय” का दर्जा दिया गया था, भाजपा सरकार ने एक झटके में न केवल पेंशन छीनी बल्कि बुज़ुर्गों का मान-सम्मान भी छीन लिया।
चौंकाने वाले आंकड़े
निर्मल सिंह ने बताया कि
- जनवरी 2025 में अंबाला जिले में 2,33,325 परिवार सरकारी योजनाओं से जुड़े थे
- जुलाई 2025 तक यह संख्या घटकर 2,04,220 रह गई
- जनवरी 2026 तक केवल 1,69,023 परिवार ही पात्र बचे
इस अवधि में 54,302 परिवारों को सरकारी रिकॉर्ड में अचानक “अमीर” घोषित कर दिया गया, जिससे हजारों बुज़ुर्गों की पेंशन बंद हो गई।
उन्होंने बताया कि
- 53,213 बीपीएल कार्ड कटने से 1,64,138 लोग योजनाओं से बाहर हो गए
- 1,089 गुलाबी कार्ड कटने से 11,129 लोग सामाजिक सुरक्षा से वंचित हो गए
काग़ज़ों में अमीर, हकीकत में मजबूर
चौधरी निर्मल सिंह ने आरोप लगाया कि जिन परिवारों की वास्तविक वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये से कम है, उनके पीपीपी रिकॉर्ड में 3 से 15 लाख रुपये तक की काल्पनिक आय दर्ज कर दी गई। यही झूठी एंट्री बुज़ुर्गों की पेंशन काटने का आधार बना दी गई।
सरकारी दफ्तरों के चक्कर, समाधान शून्य
उन्होंने कहा कि बुज़ुर्ग, विधवाएं और दिहाड़ी मजदूर महीनों से एडीसी कार्यालय, सरल केंद्र और तहसीलों के चक्कर काट रहे हैं। हर जगह सिर्फ एक जवाब मिलता है—
“डेटा में गलती है, ठीक हो जाएगी।”
लेकिन तारीखें मिलती हैं, समाधान नहीं।
संवेदनहीन सिस्टम का राज
निर्मल सिंह ने तीखा कटाक्ष करते हुए कहा कि चौपहिया वाहन, बिजली बिल या संपत्ति की एक एंट्री दिखाकर बुज़ुर्गों को सक्षम घोषित कर दिया जाता है, जबकि कई वृद्ध गंभीर बीमार हैं और पेंशन से ही उनकी दवाइयों का इंतजाम होता था।
“यह कल्याणकारी राज्य नहीं, बल्कि संवेदनहीन एल्गोरिद्म का राज है।”
मांगें
चौधरी निर्मल सिंह ने मांग की कि—
- पीपीपी की गलती से बंद की गई सभी पेंशन तत्काल बहाल की जाएं
- सभी मामलों की स्वतंत्र जांच हो
- दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए
- सुधार अवधि में प्रभावित परिवारों को अंतरिम पेंशन दी जाए, ताकि कोई बुज़ुर्ग भूख और अपमान के बीच दम न तोड़े
