
करो दुनिया में कुछ ऐसा कि दुनिया करना चाहे वैसा: डॉ. प्रतिभा
आर्य गर्ल्ज कॉलेज, अम्बाला छावनी में कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय तथा कॉलेज के यूथ क्लब तथा हिन्दी विभाग संयुक्त तत्वावधान में कमलेश मैमोरियल हिन्दी भाषाई काव्य संगोष्ठी प्रतियोगिता 2024-2025 का आयोजन किया गया जिसमें अम्बाला जोन के 9 कॉलेजों की 9 टीमों ने भाग लिया। यह प्रतियोगिता कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक समिति द्वारा प्रत्येक वर्ष आयोजित की जाती है तथा सत्र 2024-2025 में कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय सांस्कृतिक समिति के कार्यकारी बोर्ड द्वारा इस प्रतियोगिता का आयोजन आर्य गर्ल्ज कॉलेज, अम्बाला छावनी को आबंटित किया गया है।

उल्लेखनीय है कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं छात्राओं में साहित्य के प्रति रूचि तथा उनकी रचनात्मकता, बौद्धिकता को बढ़ाने में सहायक होती हैं। साहित्य के माध्यम से हम अपनी अंतर्दृष्टि को विकसित करते हैं और विश्व की विभिन्न संस्कृतियों और विचारों से परिचित होते हैं। युवा वर्ग में मातृभाषा हिन्दी तथा हिन्दी साहित्य के प्रति रूचि उत्पन्न करके हम उन्हें नैतिकता, सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय भावनाओं के प्रति संवेदनशील बना सकते हैं। कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्जवलित करके किया गया। मुख्यातिथि के पद को प्रो. विवेक चावला, निदेशक युवा एवं सांस्कृतिक कार्य निदेशालय कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय ने सुशोभित किया। एस्टीमड गेस्ट की पद की शोभा डॉ. हरविन्द्र राणा, युवा एवं सांस्कृतिक कार्य निदेशालय, कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा बढ़ाई गई जबकि कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि का पद डॉ. प्रतिभा सिंह, पूर्व सदस्य बाल आयोग, पूर्व निदेशक चाइल्ड हैल्पलाईन हरियाणा विराजमान हुईं। कार्यक्रम में कॉलेज की सेवानिवृत्त प्रो. डॉ. संध्या गौतम, डॉ. जोगिन्द्र, अंजलि वधावन तथा अम्बाला से अन्य गणमान्य लोग अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. अनुपमा आर्य ने अतिथियों का स्वागत ओम स्मृति चिन्ह तथा पौधा प्रदान करके किया। प्राचार्या महोदया ने कहा कि कविता कवि के हृदय की बात, उसके अनुभवों और भावनाओं की अभिव्यक्ति है जो पाठक को सोचने और महसूस करने के लिए प्रेरित करती है। कविता भाषा की संुदरता और शक्ति को उजागर करती है। मातृभाषा हिन्दी पर कविता केवल भाषा की संुदरता को ही नहीं दर्शाती है बल्कि ये तो हमारी सांस्कृतिक धरोहर और पहचान को भी प्रतिबिंबित करती हैं। उन्होंने कहा कि कविता लेखन से व्यक्ति को अपनी भावनाओं को व्यक्त करने, दुनिया को नए नजरिए से देखने और अपनी रचनात्मकता को बढ़ाने का अवसर मिलता है। उन्होंने छात्राओं द्वारा बोली गई कविताओं की प्रशंसा की तथा उन्होंने प्रोत्साहित करते हुए कहा कि साहित्य का व्यक्ति के जीवन में बहुत महत्व है क्योंकि कविता समाज में व्याप्तत बुराईयों, अन्याय और असमानता के खिलाफ आवाज उठाती है और लोगों को जागरूक करती है।

इस अवसर पर हरविन्द्र राणा जी ने सभी के स्नेहपूर्ण अनुरोध पर भगवान शिव जी के गीतिकाव्य द्वारा समाज में व्याप्त कटु सच्चाई को उजागर किया। मुख्यातिथि प्रो. विवेक चावला ने कहा कि बदलते हुए दौर में जब सारी दुनिया मोबाइल में व्यस्त है ऐसे में युवा वर्ग कविताओं के द्वारा मन के भावों को व्यक्त करें क्योंकि सभ्यता, संस्कृति से जुड़ना युवा वर्ग के लिए आवश्यक है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया और कहा कि उन्हें प्रसन्नता हुई कि विद्यार्थी भावों से भरे हैं तथा इस तरह की साहित्यिक प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों के सर्वमुखी विकास हेतु आवश्यक है। उन्होंने सभी छात्राओं को तथा कार्यक्रम प्रभारियों को बधाई दी। विशिष्टि अतिथि डॉ. प्रतिभा सिंह ने कहा कि उन्हें सभी कविताएं पसंद आईं। उन्होंने प्रोत्साहित करते हुए कहा कि ‘‘करो दुनिया में कुछ ऐसा कि दुनिया करना चाहे वैसा’’। अंजली वधावन ने भी छात्राओं को दिलोदिमाग से सशक्त होने तथा प्रयास करने हेतु प्रोत्साहित किया। डॉ. जोगिन्द्र सिंह ने कहा कि किसी भी अवस्था को शब्दों में व्यवस्थित करना ही कविता है। उन्होंने श्री पवन व साधना जे.बी.टी., कॉलेज मोहड़ा के साथ आम के पौधे कॉलेज के वातावरण को स्वच्छ बनाने हेतु प्रदान किए। प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल की भूमिका सी.डी.एस. कौशल, डायरेक्टर, संस्कृत प्रकोष्ठ, हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी पंचकूला, डॉ. दिनेश, सेवानिवृत प्रोफेसर, कुरूक्षेत्र, डॉ. बृज शर्मा, रेडिया और मंच लेखक, अभिनेता निर्देशक, कुरूक्षेत्र ने निभाई। प्राचार्या महोदया ने निर्णायक मंडल के सदस्यों को ओम स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। प्रतियोगिता में पढ़ी गई कुछ प्रमुख स्वरचित कविताएं तथा इस प्रकार थी- नारी सशक्तिकरण विषय पर कु. आंचल, बी.कॉम, द्वितीय वर्ष द्वारा ‘‘स्वयं में ब्राह्मण्ड समाए, भावनाओं में डूबी स्त्रियां अक्सर बेहद खूबसूरत होती हैं तथा कु. लगन, एम.ए. प्रथम द्वारा ‘‘चाहे जो हो जाए गोविन्द लाज बचाने तुम्हें ना बुलाउंगी’’ कविताओं का पाठन किया गया। टीम 1 से भी प्रतिभागी ने ‘‘काश में लड़का होती’’ कविता का पाठन कर कन्या भू्रण हत्या विषय पर अपने विचार प्रकट किए। कुछ अन्य कविताएं ‘‘तड़प रही थी मैं भटक रही थी मैं’’ सुप्त युगनिर्माता, किस्मत आज किसान की, फिर भी हिम्मत न टूटी, दीपावली पर क्यों न आए पापा अब की बार, मुट्ठी में कुछ सपने लेकर, भूल गए हम उनको, कथानक व्याकरण समझे तो सुरक्षित छंद हो जाए, वीरता को पढ़ रही हूं मैं, मैं उस भारत से आती हूं, झांसी की रानी, एक बूंद दास्तां, भारत की भाषा हिन्दी हूं, कुर्बानी भी प्रस्तुत की गई। डॉ. सी.डी.एस. कौशल ने भी ‘‘सीता-सीता राम कहने का समय अब आ गया, राधे-राधे राम कहने का समय अब आ गया’’ कविता प्रस्तुत की जिसे सभी ने सराहा। इस कार्यक्रम के मुख्य प्रभारी प्रो. सिल्वी अग्रवाल तथा डॉ. सुमन बाला रहे तथा मंच संचालन का कार्य डॉ. सुमन बाला ने संभाला। यह कार्यक्रम हिन्दी विभागाध्यक्ष श्रीमति ममता भटनागर तथा यूथ क्लब के अन्य सदस्यों डॉ. शचि शुक्ला, डॉ. अनु वर्मा, डॉ. प्रिया शर्मा की देखरेख में सम्पन्न हुआ। स्टाफ के सभी सदस्य कार्यक्रम में मौजूद रहे तथा उन्होंने प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत की गई कविताओं का आनंद लिया। इस प्रतियोगिता में रिक्मेडिड टीम को 3100, कमेंडेड टीम को 2100 तथा तृतीय रही टीम को 1100 रूप्ए तथा सांत्वना पुरस्कार प्राप्त दो टीमों को 500-500 रूपए की ईनाम राशि प्रदान की गई। इस प्रतियोगिता में विभिन्न कॉलेजों जैसे कि देव समाज कॉलेज, अम्बाला शहर, गांधी मैमोरियल नैशनल कॉलेज, अम्बाला छावनी, आर्य गर्ल्ज कॉलेज, अम्बाला छावनी, तुलसी कॉलेज फॉर एजूकेशन, गवर्नमेंट कॉलेज फॉर वूमेन, अम्बाला शहर, एस.डी. कॉलेज, अम्बाला छावनी, गवर्नमेंट कॉलेज, अम्बाला छावनी, एस.ए. जैन कॉलेज, अम्बाला शहर, एम.डी.एस.डी. कॉलेज, अम्बाला शहर से कुल 17 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
प्रतियोगिता के परिणाम इस प्रकार रहे-
रिकमेंडिड – लविका शर्मा, गर्वनमेंट पी.जी. कॉलेज, अम्बाला छावनी।
कमेंडिड – आकांक्षा, तुलसी कॉलेज, फॉर एजूकेशन, अम्बाला शहर।
तृतीय पुरस्कार – खुशी गर्ग, गवर्नमेंट पी.जी. कॉलेज, अम्बाला छावनी
सांत्वना पुरस्कार – प्रगति, जी.एम.एन कॉलेज, अम्बाला छावनी, आंचल कुमारी आर्य गर्ल्ज कॉलेज, अम्बाला छावनी।
